गुरुवार, 9 दिसंबर 2010

koi pagal samajta hai

कोई दीवाना कहता है.
कोई पागल समझता है.
मगर धरती की बेचैनी,
को बस बादल समझता है.

मैं तुझसे दूर कैसा हूँ
तू मुझसे दूर कैसी है.
यह तेरा दिल समझता है,
या मेरा दिल समझता है.

मोहब्बत एक एहसासों की पावन सी कहानी है,
कभी कबीरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है.
यहाँ सब लोग कहते हैं मेरी आँखों मैं आंसू है,
जो तू समझे तो मोती है,जो न समझे तो पानी है.
समंदर पीर का अंदर है लेकिन रो नहीं सकता,
यह आँसू प्यार का मोती है इसको खो नहीं सकता,,
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना मगर सुनले
जो मेरा हो नहीं पाया वो तेरा हो नहीं सकता.


भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामा,
हमारे दिल मैं कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा,,
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का,
मैं किस्से को हकीकत मैं बदल बैठा तो हंगामा........................


yeh kavita ek mashur shyar ki hai..
yaha pe sirf publish ki hai

1 टिप्पणी:

  1. ये शायरी डॉक्टर कुमार विश्वास की है उसका प्रोफाइल आप विकी पर चेक कर सकते हैं http://en.wikipedia.org/wiki/Kumar_Vishwas

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