सोमवार, 1 अगस्त 2011

चाहत की धुन मैं चाहत भुला बैठा,

चाहत की धुन मैं चाहत भुला बैठा,
लोग कहते है अपने लिए अपनों को भुला बैठा..

कितना कड़वाहट भरी मेरी बातौं ने,
जितनी राहत बाटी अपनों मैं,
सोचता हु कहा गलत हो गया,
क्यूँ खो गया मैं अपनी रहौं मैं,

चाहत की धुन मैं चाहत भुला बैठा,
लोग कहते है अपने लिए अपनों को भुला बैठा..

अपनों क लिए भुला बैठा खुद को,
जल रहा हूँ किसी की रहा रोशन करने को,
फिर भी कम नहीं है आंख मे सागर बहने को,
फिर भी कसक है एक पल साथ पाने को

फिर क्यूँ लोग कहते अपने लिए अपनों को भुला बैठा,
तेरी धुन मैं तुझे भुला बैठा
:'(

रविवार, 29 मई 2011

कुछ लोग अपनी बात करते हैं

कुछ लोग अपनी बात करते हैं,
साथ देने को जहाँ भर का प्यार रखते हैं..
न जाने साथ चलने से भी डरते हैं ,

जिसे देखो अपनी रह बुनता हैं,
जिसे देखो अपनी चाह धुनता है,
सच दुनिया मैं प्यार कितना कम है..
अपने लिए जादा अपनों के लिए कम है,

कुछ लोग अपनी बात करते हैं,
दूर रहके पास आने की बात करते है..
पास आते ही बहुत दूर की बात करते हैं,

वो हमसे पूछते है क्या नया है,
वो हमसे पूछते तुमने क्या किया है,
चाहत मैं क्या कर गुजरे उन्हें कैसे बताये..
अपनी जान देकर किसी को यकीन दिलाये,

सब लोग अपनी बात करते हैं..
यह दुनिया बड़ी गैर है,
यहाँ लोग चाहत की बात करते हैं..
अगले से जादा खुद को प्यार करते हैं