चाहत की धुन मैं चाहत भुला बैठा,
लोग कहते है अपने लिए अपनों को भुला बैठा..
कितना कड़वाहट भरी मेरी बातौं ने,
जितनी राहत बाटी अपनों मैं,
सोचता हु कहा गलत हो गया,
क्यूँ खो गया मैं अपनी रहौं मैं,
चाहत की धुन मैं चाहत भुला बैठा,
लोग कहते है अपने लिए अपनों को भुला बैठा..
अपनों क लिए भुला बैठा खुद को,
जल रहा हूँ किसी की रहा रोशन करने को,
फिर भी कम नहीं है आंख मे सागर बहने को,
फिर भी कसक है एक पल साथ पाने को
फिर क्यूँ लोग कहते अपने लिए अपनों को भुला बैठा,
तेरी धुन मैं तुझे भुला बैठा
:'(